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National Means Cum Merit scholarship exam NMMS EXAM 2023

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नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कोलरशिप स्कीम (NMMSS) (नवीन संशोधित गाइडलाइन सत्र 2022 - 23 से) राजस्थान राज्य में नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कोलरशिप परीक्षा 2023 के ऑनलाइन आवेदन शालादर्पण पोर्टल पर विद्यालय लोगिन से संस्था प्रधान द्वारा दिनांक 20.09.2022 से 30.09.2022 तक भरे जाएंगे।  (एसआर रजिस्टर, शाला दर्पण, आधार कार्ड ) तीनों रिकॉर्ड में विद्यार्थी की सभी एंट्री अक्षरशः सही हों। स्कूल शाला दर्पण लॉगिन करने के बाद > योजनाएं > एन एम एम एस > निर्देश पढ़ने के बाद चेक बाॅक्स टिक करें > ok दबाएं  कक्षा - 8 के सभी बच्चों के नाम ओपन हो जाएंगे  जिस बच्चे का एन एम एम एस फाॅर्म भरना है- > Fill application  आवश्यक दस्तावेज 1. कक्षा सात की अंक तालिका की फोटोकॉपी ( विद्यार्थी ने सातवीं कक्षा राजकीय विद्यालय से की हो ) विद्यार्थी के 7वीं में 55% से कम न हो, SC,ST 50% से कम न हो  2. जाति प्रमाण पत्र फोटोकॉपी (SC,ST के लिए) 3. आय प्रमाण पत्र (आय 3.5 लाख से अधिक न हो)  4. आधार कार्ड फोटोकॉपी 5. निशक्तजन के लिए निशक्तता प्रमाण पत्र फोटोकॉपी  Note- SC, S...

Child care leave CCL चाइल्ड केयर लीव RSR

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चाइल्ड केयर लीव(CCL) की सामान्य जानकारी FAQ के रूप में (1)चाइल्ड केयर लीव सेवाकाल में कितनी बार एवं कुल कितने दिन की मिलती है। उत्तर:-किसी भी महिला राज्य कार्मिक को प्रथम दो जीवित संतानों की देखभाल के लिए पूरे सेवाकाल में 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव अवकाश मिलती है। नियम 103 C (आदेश Fd Date 22/05/2018) (2) चाइल्ड केयर लीव किन किन कारणों से ले सकते है ? उत्तर:-दो बच्चों के 18 वर्ष तक की आयु होने तक उनकी बीमारी,परीक्षा,पालन पोषण, आदि कारण से बच्चों की देखभाल के लिए यह अवकाश मिलता है। नोट:-Fd आदेश date 31/07/20 के अनुसार 40% या इससे अधिक दिव्यांग बच्चे के लिए आयु सीमा का कोई बंधन नही रहेगा। (3) क्या एकल पुरुष(विधुर,तलाकशुदा) को भी चाइल्ड केयर लीव मिल सकती है? उत्तर:- FD के 31/07/2020 के अनुसार चाइल्ड केयर लीव उपरोक्त कारणों से एकल पुरुष राजकीय कार्मिक(विधुर,तलाकशुदा) को भी मिलेगी। (4) चाइल्ड केयर लीव एक कैलेन्डर वर्ष में कितनी बार ले सकते है? उत्तर:- तीन बार(Three Spells) नोट-जो Spell (अवकाश का भाग) एक कैलेंडर वर्ष में शुरू होकर अगले कैलेंडर वर्ष में समाप्त होगा,तो व...

भारत में पांच हजार व दस हजार रुपये के नोटों का इतिहास

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भारत में 10,000 रुपए के नोट स्वतंत्रता के पूर्व प्रचलित थे। पहला 10 हजार रुपए का नोट 1 जनवरी 1928 से जून 1929 तक चला। इन नोटों को नासिक में पहली बार छापा गया था। इससे पहले ब्रिटेन में नोट छपा करते थे। इन्हें जनवरी 1946 में बैन कर दिया गया। इसके बाद भारत में 5000 के नोटों का प्रचलन 1954 से 1978 तक रहा।

RTE के तहत प्राइवेट स्कूल में निशुल्क प्रवेश कराएं

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निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में एडमिशन की प्रक्रिया 2 मई से शुरू होगी। प्राइमरी एजुकेशन डिपार्टमेंट की ओर से ऑनलाइन आवेदन के लिए 2 से 15 मई तक मांगे है, जबकि 17 मई को प्राप्त होने वाले आवेदनों की लॉटरी निकालकर उनको प्रायोरिटी दी जाएगी। इस प्रक्रिया में प्रदेश में करीब 25 हजार स्कूलों में 1.25 लाख से ज्यादा सीटों पर गरीब बच्चों को फ्री एडमिशन दिया जाएगा।     आरटीई के तहत क्लास फर्स्ट में बच्चों को एडमिशन मिलेगा। इसके लिए बच्चे की उम्र 5-7 साल के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट और यहां के मूल या स्थायी निवास के दस्तावेज लगाने होंगे। इसमें दो केटेगिरी दुर्बल वर्ग और असुविधा समूह में आने वाले बच्चों को एडमिशन मिलेगा। दुर्बल वर्ग में वे बच्चे जिनके माता-पिता की आय 2.50 लाख रुपए सालाना या उससे कम हो। जबकि असुविधा समूह में एससी, एसटी वर्ग के अलावा अनाथ बच्चा, एचआईवी या कैंसर पीड़ित या इन बीमारी से प्रभावित माता-पिता के बच्चे, युद्ध विधवा के बच्चे, बीपीएल और नि:शक्त बच्चे शामिल है।        आरटीई कानून के तहत प्...

Bharkhama भरखमा (राजस्थानी कहानी संग्रह ) पुस्तक की समीक्षा

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पुस्तक समीक्षा :- धरती जेहा भरखमा,  नमणा जेही केळि। मज्जीठां जिम रच्चणाँ, दई, सु सज्जण मेळि। यो दोहो ढोला मारू रा दूहा नाम गी किताब सूं लियो है। अब थे आ बात ना चेतियो की म्हाने ऄं दोहे सूं किं लेणोदेणो नीं है। ऄं दोहे गो अर्थ बाद में बताउंगा पेली दूसरी बात सुणो:-      आज म्हाने डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी गो लिखेड़ो कहाणी संग्रे 'भरखमा' बांचणे  गो ओसर मिलो। म्हाने लाग् क् डाॅ. जितेंद्र कुमार सोनी गी पिछाण कराणे गी तो जरूरी नीं है। फेर भी थोड़ो आं ग बारे में बता दूं। डाॅ. जितेंद्र कुमार सोनी (आई ए एस ) हाल टैम म नागोर में जिला कलेक्टर है, कलेक्टर गे सागे सागे डॉ. साब की साहित्य में घणी रुचि है। आं हिंदी, बिलायती, राजस्थानी अर् पंजाबी भासा साहित्य में चोखो लिख्यो है।             भरखमा राजस्थानी भासा गो कहाणी संग्रै है, ऄं किताब मं तीन बड़ी बड़ी कहाणी है। आ किताब आपणी भासा (राजस्थानी भासा) मं है,  अर् बोधि प्रकाशन जैपुर सूं छापेड़ी है। उपर लिखेड़ो दोहे सूं किताब लिखणी सरु करी है। किताब गे नाम सारु किताब गो डोळ अर् ऄं मं लिखेड़ी ब...

स्वामी केशवानंद जी की जीवनी Swami Keshwanand

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एक गरीब बालक के रूप में जिंदगी का सफर शुरू करने वाले बिरमा राम अपनी लगन और कर्मफल से शिक्षा संत स्वामी केशवानंद जी के रूप में विख्यात हुए। इन्होंने अंग्रेजी शासन काल में शिक्षा की जोत जगाने के लिए 287 विद्यालय और शिक्षण संस्थान खोले, जिसमें ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया प्रमुख है।       स्वामी केशवानंद जी, जिन्हें सीमांचल के शिक्षा संत के रूप में जाना जाता है, ने शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है। उनके द्वारा स्थापित सैकड़ों विद्यालय आज भी हनुमानगढ़, गंगानगर, चूरू, आबोहर और फाजिल्का जिलों के लोगों को शिक्षा का लाभ पहुंचा रहे हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षा के माध्यम से उन्होंने एक नई दिशा दी, जो उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है।            स्वामी केशवानंद जी न केवल एक शिक्षा संत थे, बल्कि एक समाज सुधारक भी थे। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रयास किए। 1942 में ग्रामोथन विद्यापीठ संगरिया के रजत जयंती समारोह के अवसर पर स्वामी जी ने मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओ...

छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती Shahuji Maharaj Jayanti

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जन्म :  26 जून 1874, कागल  मृत्यु :  6 मई 1922, बंबई छत्रपति शाहूजी महाराज के बचपन का नाम यशवंतराव था। जब शाहूजी महाराज बालावस्था में थे तभी उनकी माता राधाबाई का निधन तब हो गया । उनके पिता का नाम श्रीमान जयसिंह राव अप्पा साहिब घटगे था। कोलहापुर के राजा शिवजी चतुर्थ की हत्या के पश्चात उनकी विधवा आनन्दीबाई ने उन्हें गोद ले लिया। शाहूजी महाराज को अल्पायु में ही कोल्हापुर की राजगद्दी का उतरदायित्व वहन करना पड़ा। वर्ण-विधान के अनुसार शहूजी शूद्र थे। वे बचपन से ही शिक्षा व कौशल में निपुर्ण थे। शिक्षा प्राप्ति के पश्चात् उन्होने भारत भ्रमण किया। यद्यपि वे कोल्हापुर के महाराज थे परन्तु इसके बावजूद उन्हें भी भारत भ्रमण के दौरान जातिवाद के विष को पीना पड़ा। नासिक, काशी व प्रयाग सभी स्थानों पर उन्हें रूढ़ीवादी ढोंगी ब्राम्हणो का सामना करना करना पड़ा। वे शाहूजी महाराज को कर्मकांड के लिए विवश करना चाहते थे परंतु शाहूजी ने इंकार कर दिया। समाज के एक वर्ग का दूसरे वर्ग के द्वारा जाति के आधार पर किया जा रहा अत्याचार को देख शाहूजी महाराज ने न केवल इसका विरोध किया बल्कि दलित उद्धार योज...