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RTE के तहत प्राइवेट स्कूल में निशुल्क प्रवेश कराएं

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निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में एडमिशन की प्रक्रिया 2 मई से शुरू होगी। प्राइमरी एजुकेशन डिपार्टमेंट की ओर से ऑनलाइन आवेदन के लिए 2 से 15 मई तक मांगे है, जबकि 17 मई को प्राप्त होने वाले आवेदनों की लॉटरी निकालकर उनको प्रायोरिटी दी जाएगी। इस प्रक्रिया में प्रदेश में करीब 25 हजार स्कूलों में 1.25 लाख से ज्यादा सीटों पर गरीब बच्चों को फ्री एडमिशन दिया जाएगा।     आरटीई के तहत क्लास फर्स्ट में बच्चों को एडमिशन मिलेगा। इसके लिए बच्चे की उम्र 5-7 साल के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट और यहां के मूल या स्थायी निवास के दस्तावेज लगाने होंगे। इसमें दो केटेगिरी दुर्बल वर्ग और असुविधा समूह में आने वाले बच्चों को एडमिशन मिलेगा। दुर्बल वर्ग में वे बच्चे जिनके माता-पिता की आय 2.50 लाख रुपए सालाना या उससे कम हो। जबकि असुविधा समूह में एससी, एसटी वर्ग के अलावा अनाथ बच्चा, एचआईवी या कैंसर पीड़ित या इन बीमारी से प्रभावित माता-पिता के बच्चे, युद्ध विधवा के बच्चे, बीपीएल और नि:शक्त बच्चे शामिल है।        आरटीई कानून के तहत प्...

Bharkhama भरखमा (राजस्थानी कहानी संग्रह ) पुस्तक की समीक्षा

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पुस्तक समीक्षा :- धरती जेहा भरखमा,  नमणा जेही केळि। मज्जीठां जिम रच्चणाँ, दई, सु सज्जण मेळि। यो दोहो ढोला मारू रा दूहा नाम गी किताब सूं लियो है। अब थे आ बात ना चेतियो की म्हाने ऄं दोहे सूं किं लेणोदेणो नीं है। ऄं दोहे गो अर्थ बाद में बताउंगा पेली दूसरी बात सुणो:-      आज म्हाने डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी गो लिखेड़ो कहाणी संग्रे 'भरखमा' बांचणे  गो ओसर मिलो। म्हाने लाग् क् डाॅ. जितेंद्र कुमार सोनी गी पिछाण कराणे गी तो जरूरी नीं है। फेर भी थोड़ो आं ग बारे में बता दूं। डाॅ. जितेंद्र कुमार सोनी (आई ए एस ) हाल टैम म नागोर में जिला कलेक्टर है, कलेक्टर गे सागे सागे डॉ. साब की साहित्य में घणी रुचि है। आं हिंदी, बिलायती, राजस्थानी अर् पंजाबी भासा साहित्य में चोखो लिख्यो है।             भरखमा राजस्थानी भासा गो कहाणी संग्रै है, ऄं किताब मं तीन बड़ी बड़ी कहाणी है। आ किताब आपणी भासा (राजस्थानी भासा) मं है,  अर् बोधि प्रकाशन जैपुर सूं छापेड़ी है। उपर लिखेड़ो दोहे सूं किताब लिखणी सरु करी है। किताब गे नाम सारु किताब गो डोळ अर् ऄं मं लिखेड़ी ब...

स्वामी केशवानंद जी की जीवनी Swami Keshwanand

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एक गरीब बालक के रूप में जिंदगी का सफर शुरू करने वाले बिरमा राम अपनी लगन और कर्मफल से शिक्षा संत स्वामी केशवानंद जी के रूप में विख्यात हुए। इन्होंने अंग्रेजी शासन काल में शिक्षा की जोत जगाने के लिए 287 विद्यालय और शिक्षण संस्थान खोले, जिसमें ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया प्रमुख है।       स्वामी केशवानंद जी, जिन्हें सीमांचल के शिक्षा संत के रूप में जाना जाता है, ने शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है। उनके द्वारा स्थापित सैकड़ों विद्यालय आज भी हनुमानगढ़, गंगानगर, चूरू, आबोहर और फाजिल्का जिलों के लोगों को शिक्षा का लाभ पहुंचा रहे हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षा के माध्यम से उन्होंने एक नई दिशा दी, जो उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है।            स्वामी केशवानंद जी न केवल एक शिक्षा संत थे, बल्कि एक समाज सुधारक भी थे। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रयास किए। 1942 में ग्रामोथन विद्यापीठ संगरिया के रजत जयंती समारोह के अवसर पर स्वामी जी ने मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओ...

छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती Shahuji Maharaj Jayanti

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जन्म :  26 जून 1874, कागल  मृत्यु :  6 मई 1922, बंबई छत्रपति शाहूजी महाराज के बचपन का नाम यशवंतराव था। जब शाहूजी महाराज बालावस्था में थे तभी उनकी माता राधाबाई का निधन तब हो गया । उनके पिता का नाम श्रीमान जयसिंह राव अप्पा साहिब घटगे था। कोलहापुर के राजा शिवजी चतुर्थ की हत्या के पश्चात उनकी विधवा आनन्दीबाई ने उन्हें गोद ले लिया। शाहूजी महाराज को अल्पायु में ही कोल्हापुर की राजगद्दी का उतरदायित्व वहन करना पड़ा। वर्ण-विधान के अनुसार शहूजी शूद्र थे। वे बचपन से ही शिक्षा व कौशल में निपुर्ण थे। शिक्षा प्राप्ति के पश्चात् उन्होने भारत भ्रमण किया। यद्यपि वे कोल्हापुर के महाराज थे परन्तु इसके बावजूद उन्हें भी भारत भ्रमण के दौरान जातिवाद के विष को पीना पड़ा। नासिक, काशी व प्रयाग सभी स्थानों पर उन्हें रूढ़ीवादी ढोंगी ब्राम्हणो का सामना करना करना पड़ा। वे शाहूजी महाराज को कर्मकांड के लिए विवश करना चाहते थे परंतु शाहूजी ने इंकार कर दिया। समाज के एक वर्ग का दूसरे वर्ग के द्वारा जाति के आधार पर किया जा रहा अत्याचार को देख शाहूजी महाराज ने न केवल इसका विरोध किया बल्कि दलित उद्धार योज...

World Environment Day विश्व पर्यावरण दिवस

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विश्व पर्यावरण दिवस पृथ्वी पर बढते हुये पर्यावरण प्रदूषण को ध्यान मे रखते हुए UNO ने सन् 1972 मे स्टोकहोम (स्वीडन) मे विश्व का पहला पर्यावरण सम्मेलन कराया। इसमे 119 देशों ने भाग लिया। इस सम्मेलन मे लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिये संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) प्रारंभ किया, तथा प्रति वर्ष 5जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रुप मे मनाने का निर्णय लिया गया। इसका प्रमुख उद्देश्य राजनैतिक चेतना द्वारा पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण रखना है। इसलिए भारत मे सन् 1986 मे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम बनाया गया। वर्तमान मे मानव की स्वार्थी गतिविधियों द्वारा पर्यावरण प्रदूषण बढता जा रहा है। जिसके कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है, फलस्वरूप ग्लोबल वार्मिंग, सूखा, बाढ, अपरदन आदि प्राकृतिक आपदाएं बढ रही है। अतः प्रत्येक नागरिक को सकारात्मक सोच रखते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिये वृक्षारोपण व अन्य उपाय करना चाहिए। जय भारत। :~Rohtash  Assistant professor  RSCERT, Udaipur (Rajasthan) 

महात्मा बुद्ध पूर्णिमा Mahatma Budh Purnima

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वैशाख पूर्णिमा को महात्मा बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है, क्योंकि इस दिन महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था।  गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई.पूर्व मे लुंबिनी (नेपाल) मे हुआ। ये बोद्ध धर्म के प्रवर्तक तथा विश्व मे शांति स्थापना के अग्रदूत थे। इन्होंने अंधविश्वास और पाखंड को छोड़कर ज्ञान का मार्ग बताया। इनके अनुसार हर घटना के पिछे कोई कारण होता है तथा चमत्कार जैसी कोई चीज नहीं होती। इनके अनुसार पंरपरा मे बंधकर कोई कार्य मत करो ,प्रत्येक कार्य अपने विवेक और ज्ञान से परख करके करो तथा अपना दीपक स्वयं बनो। बोद्ध धर्म में मानवीय गरीमा का ध्यान रखते हुए सभी को समानता का हक हैं। इन्होंने सही जीवन जीने के लिए 22 प्रतिज्ञाएं दी। इन्होंने मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दी। 483ई.पूर्व मे कुशीनगर (भारत) मे भगवान बुद्ध की 80 वर्ष की आयु मे मृत्यु हो गई।

अन्तरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस International Biodiversity Day

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22 मई को अन्तर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के रूप में मनाया जाता है। संपूर्ण पृथ्वी या किसी प्राकृतिक आवास मे विभिन्न प्रकार के पादप और जन्तुओं की जातियाँ पाइ जाती हैं। जीवों की इस विविधता को ही जैवविविधता कहते है। पृथ्वी पर लगभग 300000 पादप जातियां व लगभग 400000 जन्तुओं की जातियां पाई जाती हैं। भारत मे लगभग 45000 पादप जातियाँ और लगभग 90000 जन्तुओं की जातियां पाइ जाती हैं। वनों की अंधाधुंध कटाई व प्रदूषण के कारण वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। जिसके कारण बहुत सी पादप व जन्तु जातियां विलुप्त हो गई और बहुत से पादप और जन्तु विलुप्ति के कगार पर है। जीवों के नष्ट होने के कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है जिसके फलस्वरूप प्राकृतिक आपदाएं आती हैं। अतः हमें जीवों की सुरक्षा करके प्राकृतिक संतुलन मे सहायता करनी चाहिए। हम प्रकृति को सुरक्षित रखेंगे तो प्रकृति हमें सुरक्षित रखेगी।