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विश्व पुस्तक दिवस World Books Day

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विश्व पुस्तक दिवस विशेष... 23 अप्रैल को यूनेस्को ने विश्व पुस्तक दिवस घोषित किया। यह 1995 में शुरू किया गया। प्रसिद्ध लेखक मिगुएल डी सर्वेटेन्स की याद में विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है। उनका देहांत 23 अप्रैल को हुआ था। विश्व पुस्तक दिवस पर स्वरचित कविता।  ~:वर्तमान में किताबें:~ छोड़ दी समेटकर अलमारी मे, कुछ नई सी कुछ पुरानी सी। कुछ नटखट सी कुछ सुहानी सी, कुछ वर्तमान सी कुछ अतीत की कहानी सी।। आज किताबें कहाँ ?लेखक कौन ? जेब मे आ गए स्मार्टफोन । अब हजारों किताबें हैं PDF मे संभव, पढने से नहीं होता खुशी का अनुभव।। पहले बड़ा मजा आता था, लाईन पर ऊंगली रखकर पढाने मे। सिर्फ दो लाईन ही काफी थी , चेहरे की मुस्कान बढाने मे।। अब online  पढते हैं, सब  काम छोड़कर । बस फोन की स्क्रीन देखते हैं, सारे  रिस्ते  छोड़कर ।। बहुत समय गंवाया है सोसल साईट पर, अब घर का रूख मोड़ लो । अगर पढने का आनंद लेना है , तो किताबों से रिस्ता  जोड़ लो ।। :- रोहताश घोटड़

अन्तरराष्ट्रीय पृथ्वी दिवस International Earth Day

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२२अप्रैल १९७० को पहली बार पृथ्वी दिवस मनाया गया तथा २२ अप्रैल १९९० से पुनर्चक्रीकरण के प्रयास से पर्यावरण संरक्षण के लिये विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता हैं। १९९२ मे रियो डि जेनेरियो मे संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी सम्मेलन रखा गया। पर्यावरण प्रदूषण व ग्लोबल वार्मिंग भी इसी से संबंधित हैं।आज-कल चाहे कोई दिवस हो हम सोसल साइट पर मना लेते हैं।पृथ्वी दिवस पर हमारे भी कुछ उद्देश्य और कर्तव्य होने चाहिए।हमें भी कुछ संकल्प लेने चाहिए जैसे- प्लास्टिक और पोलिथिन का कम से कम उपयोग करना, पौधारोपण करना, पुनर्चक्रण को बढावा देना, पेस्टीसाइड का कम से कम उपयोग करना, बिजली पानी आदि का समुचित उपयोग करना, प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बढावा देना आदि प्रयास करने चाहिए। प्रकृति प्रदत्त पदार्थों जैसे जल, नदियां, वन पर्वत आदि को हम पवित्र मानकर पूजते हैं, लेकिन प्रदूषण फैलाते समय ये सब भूल जाते है। पेड़-पोधे पृथ्वी का श्रंगार होते हैं लेकिन वृक्षों की अंधाधुंध कटाई करके हम धरती माता का चीर हरण कर रहें हैं, और इसका खामियाजा हमें ग्लोबल वार्मिंग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के रुप मे भुगतना पड़ रहा हैं। इसलिए ...

NMMS EXAM 2021 / National Means Cum Merit scholarship scheme नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कोलरशिप परीक्षा 2021 |एन एम एम एस छात्रवृत्ति योजना

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National Means Cum Merit(NMMS) SCHOLARSHIP Exam 2021 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को कक्षा 8 में उनके ड्रॉपआउट को रोकने हेतु एवं माध्यमिक स्तर पर अध्ययन जारी रखने को प्रोत्साहित करने के लिए नेशनल मींस कम मेरिट(NMMS) स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। ★ नेशनल मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति  योजना मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय द्वारा 2008 में प्रारम्भ की गयी थी। ★ इस योजना में संपूर्ण भारत में कमजोर एवं आर्थिक विपन्न वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु कुल 1 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। ★ यह योजना राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी प्रोत्साहन योजना है जिन्हें अन्य किसी प्रकार की छात्रवृत्ति नही मिलती। ★  इस योजना में सरकारी विद्यालयों के कक्षा 8 में अध्ययनरत वो विद्यार्थी परीक्षा में बैठ सकते  जिन्होंने 7वीं कक्षा भी सरकारी विद्यालय से पास की है तथा जिनके अभिभावक की समस्त स्रोतों से आय 150000 से अधिक न हो (केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय मे...

सावित्रीबाई फुले जयंती Savitri Bai Fule Birth Anniversary

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सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1840 में ज्योतिबा फुले से हुआ था। सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है।  ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और शूद्र महिलाओं को शिक्षित बनाना। 'सामाजिक मुश्किलें वे स्कूल जाती थीं, तो विरोधी लोग पत्थर मारते थे। उन पर गंदगी फेंक देते थे।आज से 160 साल पहले बालिकाओं के लिये जब स्कूल खोलना पाप का काम माना जाता था कितनी सामाजिक मुश्किलों से खोला गया होगा देश में एक अकेला बालिका विद्यालय। महानायिका सावित्रीबाई पूरे देश की म...

महात्मा ज्योतिबा फूले Mahatma Jyotibafule

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    ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल, 1827 को हुआ था और निधन 28 नवंबर, 1890 को हुआ था। उनका पूरा नाम ज्योतिराव गोविंदराव फुले था। महात्मा ज्योतिबा फुले के पिता गोविंद राव एक किसान थे और पुणे में फूल बेचते थे। जब ये छोटे थे इनकी मां का देहांत हो गया था। ज्योतिबा फुले समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक और क्रांतिकारी के रुप में जाने जाते हैं।महात्मा ज्योतिबा फुले ने जाति भेद, वर्ण भेद, लिंग भेद, ऊंच नीच के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ी। यही नहीं उन्होंने न्याय व समानता के मूल्यों पर आधारित समाज की परिकल्पना प्रस्तुत की। वे महिला शिक्षा की खूब वकालत करते थे। तत्कालीन भारतीय समाज में व्याप्त बुराईयों पर प्रहार करते हुए इन्होंने प्रसिद्ध पुस्तक #गुलामगिरी लिखी।         महात्मा ज्योतिबा फुले भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के एक महान योद्धा थे। वह एक समाज सुधारक, शिक्षाविद और विचारक भी थे। उन्होंने भारतीय समाज को संघर्ष के रास्ते से उठाकर समाज सुधार के रास्ते पर ले जाने का बहुत अहम योगदान दिया। महात्मा ज्योतिबा फुले ने अपने जीवन के दौरान अपने समाज के लोगों की मदद करने के लिए ...

भारतीय संविधान दिवस की महत्वपूर्ण जानकारी

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      आज ही के दिन 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ। संविधान लागू होने के साथ ही सभी को मौलिक अधिकार मिले और मानवीय जीवन की प्रतिष्ठा मिली।  बाबा साहब के संविधान में महिलाओं के लिए किये गए विशेष उपबंध।  1.बहुपत्नी की परम्परा को खत्म कर नारियो को अद्भुत सम्मान दिया।  2. प्रथम वैध पत्नी के रहते दूसरी शादी को अमान्य किया।  3. बेटा की तरह बेटी को भी पिता की सम्पति में अधिकार का प्रावधान किया।  4 . गोद लेने का अधिकार दिया।  5. तलाक लेने का अधिकार दिया।  6. बेटी को वारिश बनने का अधिकार दिया।  7. प्रसव छुट्टी का प्रावधान किया।  8.सामान काम के लिए पुरुषो सा सामान वेतन पाने का अधिकार दिया. 9. स्त्री की क्षमता के अनुसार ही काम लेने का प्रावधान किया।  10 भूमिगत कोल खदानों में महिलाओं के काम करने पर रोक लगाया।  11. श्रम की अवधी 12 घंटा से घटा कर 8 घंटा किया।  12. लिंग भेद को खत्म किया।  13. बाल विवाह पर रोक लगाया।  14....

किसानों के मसीहा, स्वतंत्रता सेनानी, दीनबंधु सर छोटुराम की जीवनी

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किसानों के मसीहा, स्वतंत्रता सैनानी, समाज सुधारक, न्याय विद, दीनबंधु सर छोटूराम की जीवनी।  जन्म की तारीख और समय :   24 नवंबर 1881,  गढ़ी साँपला किलोई विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, हरियाणा मृत्यु की जगह और तारीख :   9 जनवरी 1945,  लाहौर, पाकिस्तान सर छोटूराम का जन्म रोहतक के गांव गढी सांपला मे एक साधारण परिवार में हुआ। इनका असली नाम राम रिछपाल था। ये घर में सबसे छोटे थे तो इन्हें छोटू राम कहकर बुलाया जाने लगा। प्रारंभिक पढ़ाई के बाद उन्होंने दिल्ली के 'संत स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और फिर एलएलबी पढ़ने वो इलाहाबाद चले गए। फिर पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वापस लौटकर वकालत भी की और इसी दौरान वो कांग्रेस में शामिल हो गए। 1920 में उन्होंने सभी समुदायों के किसानों को एकजुट करना शुरू कर दिया और एक नए राजनीतिक दल जमींदारा पार्टी का गठन किया।ब्रिटिश राज में किसान उन्हें अपना मसीहा मानते थे। वे पंजाब राज्य के एक बहुत आदरणीय मंत्री (राजस्व) थे और उन्होंने वहाँ के विकास मंत्री के तौर पर भी काम किया था।ये पद उन्हें 1937 के प्रोवेंशियल असेंबली चुनावों क...