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सर अलेक्जेंडर कनिघम Alexander Cunningham

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अलेक्जेंडर कनिंघम: भारतीय पुरातत्व के जनक अलेक्जेंडर कनिंघम (Alexander Cunningham) का नाम भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान रखता है। उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म 23 जनवरी 1814 को इंग्लैंड के लंदन में हुआ था। उन्होंने भारत में प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों, स्मारकों और पुरातात्त्विक अवशेषों का अध्ययन और संरक्षण करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा कनिंघम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इंग्लैंड में प्राप्त की और बाद में एक इंजीनियर के रूप में भारतीय सेना में शामिल हुए। भारत में रहते हुए उन्होंने भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व में गहरी रुचि विकसित की। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का गठन 1861 में लॉर्ड कैनिंग के कार्यकाल के दौरान, अलेक्जेंडर कनिंघम ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की स्थापना की। इसका उद्देश्य भारत के प्राचीन स्थलों और स्मारकों का अध्ययन करना और उन्हें संरक्षित करना था। वह ASI के पहले महानिदेशक (Director General) बने और इस पद पर रहते हुए कई महत्वपूर्ण खोजें कीं...

स्वामी विवेकानंद: एक युग पुरुष

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राष्ट्रीय युवा दिवस: स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से नई दिशा   12 जनवरी को  भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन महान दार्शनिक, समाज सुधारक और प्रेरणादायक व्यक्तित्व स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में समर्पित है। स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों और कार्यों से न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व को एक नई दिशा प्रदान की। उनकी शिक्षाएँ आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ और युवाओं के लिए संदेश: स्वामी विवेकानंद का मानना था कि युवा शक्ति समाज में सबसे बड़ा बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा था: "उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" यह वाक्य हर युवा को यह सिखाता है कि आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय, जीवन को सही दिशा देने वाला साधन माना। उनका कहना था कि शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण, मानसिक शक्ति और आत्मनिर्भरता का विकास होना चाहिए। क्यों मनाते हैं राष्ट्रीय युवा दिवस? 1984 में, भारत स...

लार्ड थोमस बैबिंगटन मैकाले Lord Thomas Bebington Mecaulay

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लार्ड थोमस बैबिंगटन मैकाले: ब्रिटिश इतिहासकार, राजनीतिज्ञ और साहित्यकार जिसने भारतीयों के लिए समान दंड संहिता लागू की। इस दंड संहिता से पहले एक ही अपराध के लिए शूद्रों को ज्यादा दंड दिया जाता था और उच्च जातियों को न के बराबर दंड मिलता था। वो केवल दंड था उसकी कोई संहिता नहीं थी। उसने सभी वर्गों के लिए सार्वभौमिक शिक्षा का अधिकार लागू किया और सभी भारतीयों को शिक्षित करने का ईमानदारी से प्रयास किया।उससे पहले शूद्रों को पढ़ने का अधिकार नहीं था। उसने कर प्रणाली में भी सुधार किया। उसने अंग्रेजी, विज्ञान, गणित और दर्शनशास्त्र पढना अनिवार्य किया। विज्ञान पढ़ने से वैज्ञानिक सोच का विकास हुआ और धर्म खतरे में पड़ गया। उसके द्वारा दी गई शिक्षा पद्धति और समान दंड संहिता के कारण भारतीयों में बहुत जागरूकता आई जो आजादी की लड़ाई में प्रेरक सिद्ध हुई। जन्म 25 अक्टूबर 1800 मृत्यु 28 दिसम्बर 1859.

पेरियार : महान समाज सुधारक

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पेरियार: एक प्रेरणास्रोत और सामाजिक सुधारक पेरियार, जिनका पूरा नाम इरोड वेंकट नायकर रामासामी था, भारतीय राजनीति और समाज सुधार में एक महत्वपूर्ण नाम हैं। उनका जन्म 17 सितंबर 1879 को हुआ और 24 दिसंबर 1973 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्हें अन्य नामों जैसे ईवीआर, पेरियार, और वायकम वीरर से भी जाना जाता है। वे एक प्रभावशाली राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता और नास्तिकवादी थे, जो जातिवाद और अंधविश्वासों के खिलाफ जीवनभर संघर्ष करते रहे।         पेरियार का जीवन उस समय के सामाजिक नियमों और धार्मिक अंधविश्वासों से टकराव की कहानी है। 15 साल की उम्र में, पिता से अनबन के चलते उन्होंने घर छोड़ दिया। इसके बाद, उन्होंने समाज में व्याप्त ब्राह्मणवाद और जातिगत असमानताओं के खिलाफ आवाज उठाई। पेरियार को ‘पेरियार’ नाम से इसलिए सम्मानित किया गया क्योंकि इसका मतलब होता है "सम्मानित व्यक्ति"। वे विशेष रूप से द्रविड़ आंदोलन के जनक माने जाते हैं, जिसे उन्होंने न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित किया।            1919 में, पेरियार भारतीय राष्...

विश्व जल दिवस। World Water Day

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**विश्व जल दिवस: संरक्षण, जागरूकता और सम्भावनाएं** प्रतिवर्ष 22 मार्च को मनाया जाने वाला 'विश्व जल 1 ਲ।  ਭੌ दिवस' एक महत्वपूर्ण अवसर है जो जल संसाधन के महत्व को अधिक जागरूक करता है। जल, हमारे अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह संसाधन धीरे-धीरे कम हो रहा है। विश्व जल दिवस एक सामाजिक उत्सव है जो हमें जल संरक्षण, जल संबंधी समस्याओं के बारे में जागरूक करने और जल संसाधन के सही उपयोग के लिए प्रेरित करता है। विश्व जल दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को जल संसाधन की महत्वता के प्रति जागरूक करना है। जल हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है और इसके बिना हमारा अस्तित्व संभव नहीं है। इसलिए, हमें जल का सही ढंग से प्रबंधन करना और इसके विपरीत उपयोग से बचना चाहिए। जल संरक्षण के लिए अधिक संचार और शिक्षा की आवश्यकता है ताकि हर व्यक्ति जल के महत्व को समझे और इसके प्रति सचेत रहे। विश्व जल दिवस के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण के लिए उत्साहित किया जाता है। इस दिन पर, विभिन्न संगठन और समुदायों में जल संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग जल संबंधी समस्याओं पर चर्चा करते हैं, ...

भीमाकोरे गांव शौर्य दिवस Bhimakore gaon Shorya Diwas

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            1 जनवरी को हम नववर्ष मनाते है आपस में बधाई देते है लेकिन 1 जनवरी बहुजन समाज के लिए ऐतिहासिक रूप से गौरवपूर्ण दिन है l हमारे समाज में बहुत ही कम लोग है जिनको यह बात मालूम है कि 1 जनवरी को बहुजन शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है l                19वीं सदी के प्रारम्भ में पुणे के राजा बाजीराव पेशवा का शासन मनुस्मृति के कानून के आधार पर चलता रहा था l महाराष्ट्र की अछूत जातियों के साथ जाति-पाति, छुआ-छूत ही नहीं शारीरिक रूप से भी घोर अत्याचार किया जा रहा था l पेशवा की क्रूरता, उदंडता और नीचता ने सभी हदें पार कर डाली l कुछ अंग्रेज शासकों ने इन अत्याचारों को रोकने का प्रयास किया लेकिन कुछ राजा उनके गुलाम थे इसलिए वे ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करते थे l          महाराष्ट्र की अंग्रेजी सेना में महार सैनिकों की एक महार रेजीमेंट थी l महार रेजीमेंट के महार सैनिक बाजीराव पेशवा के अत्याचारों से काफी कुपित थे और उनके अंदर उस अत्याचार को समाप्त करने की एक चिंगारी सुलग रही थी l संयोग से अंग्रेजों और पे...

चंद्र ग्रहण (Lunar eclipse) क्यों होता है? चंद्र ग्रहण का पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ता है?

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चंद्र ग्रहण विज्ञान में एक जब सूरज, पृथ्वी, और चंद्रमा का आकारी रूप से क्रमबद्ध सबसे अच्छी तरह से एक सीधी रेखा पर आते हैं, तो घटित होता है। इसका मुख्य कारण है कि पृथ्वी और चंद्रमा की माध्यमिक रेखा सूरज के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा को सूरज की प्रकीर्ण रोशनी से छिपा देता है। चंद्र ग्रहण पूर्ण या आंशिक हो सकता है, जो पृथ्वी के स्थिति और चंद्रमा के स्थान पर निर्भर करता है। चंद्र ग्रहण के दो प्रमुख प्रकार होते हैं: 1. पूर्ण चंद्र ग्रहण: इसमें चंद्रमा पूरी तरह से सूरज की प्रक्षेपण की रेखा के बीच आ जाता है, जिससे विस्तार से दिखाई नहीं देता। यह घटना कई घंटों तक चल सकती है, और इस दौरान चंद्रमा का पूर्णतः छिप जाना घटित होता है। 2. आंशिक चंद्र ग्रहण: इसमें चंद्रमा केवल आंशिक रूप से सूरज की प्रक्षेपण की रेखा के बीच आता है, जिससे चंद्रमा का एक हिस्सा सीधे सूरज के सामने आ जाता है। इसके दौरान चंद्रमा का कुछ हिस्सा छिप जाता है और इसे चुंबकीय ग्रहण भी कहा जाता है। पृथ्वी पर चंद्र ग्रहण का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, यह केवल एक आकाशीय घटना होती है और इसका कोई भौतिक प्रभाव नहीं होता है।...