पेरियार : महान समाज सुधारक

पेरियार: एक प्रेरणास्रोत और सामाजिक सुधारक

पेरियार, जिनका पूरा नाम इरोड वेंकट नायकर रामासामी था, भारतीय राजनीति और समाज सुधार में एक महत्वपूर्ण नाम हैं। उनका जन्म 17 सितंबर 1879 को हुआ और 24 दिसंबर 1973 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्हें अन्य नामों जैसे ईवीआर, पेरियार, और वायकम वीरर से भी जाना जाता है। वे एक प्रभावशाली राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता और नास्तिकवादी थे, जो जातिवाद और अंधविश्वासों के खिलाफ जीवनभर संघर्ष करते रहे।

        पेरियार का जीवन उस समय के सामाजिक नियमों और धार्मिक अंधविश्वासों से टकराव की कहानी है। 15 साल की उम्र में, पिता से अनबन के चलते उन्होंने घर छोड़ दिया। इसके बाद, उन्होंने समाज में व्याप्त ब्राह्मणवाद और जातिगत असमानताओं के खिलाफ आवाज उठाई। पेरियार को ‘पेरियार’ नाम से इसलिए सम्मानित किया गया क्योंकि इसका मतलब होता है "सम्मानित व्यक्ति"। वे विशेष रूप से द्रविड़ आंदोलन के जनक माने जाते हैं, जिसे उन्होंने न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित किया।

           1919 में, पेरियार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े, परंतु जल्द ही यह समझ गए कि कांग्रेस जातिवादी असमानताओं के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। 1922 में उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी कांग्रेस समिति के अध्यक्ष पद को संभाला, परंतु कांग्रेस की नीतियों से असंतुष्ट होकर उन्होंने 1925 में अलग होकर 'सेल्फ रिस्पेक्ट मूवमेंट' की स्थापना की। 

          पेरियार ने 1924 में वायकम सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जो मंदिरों में दलितों के प्रवेश के अधिकार के लिए था। 1929 में उन्होंने अपना जुड़ाव कांग्रेस से पूरी तरह समाप्त कर दिया। उन्होंने अपने जीवन के हर पहलू में जाति व्यवस्था और ब्राह्मणवाद का विरोध किया और समानता के लिए संघर्ष किया।

           1938 में, पेरियार ने तमिलों की अधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद की और 'द्रविड़ कड़गम' पार्टी की स्थापना की। यह पार्टी द्रविड़ों के अधिकार और आत्म-सम्मान के लिए समर्पित थी। 1944 में, उन्होंने जस्टिस पार्टी का नाम बदलकर 'द्रविड़ कड़गम' कर दिया।

           पेरियार ने बाल विवाह, देवदासी प्रथा, सती प्रथा और स्त्रियों पर लगे धार्मिक प्रतिबंधों का विरोध किया। वे महिलाओं की समानता के बड़े समर्थक थे और उनके शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के पक्षधर थे। पेरियार का कहना था कि सामाजिक न्याय तभी संभव है जब जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव समाप्त हो।
           पेरियार का जीवन संघर्ष और सामाजिक सुधार की एक प्रेरणादायक यात्रा है। उन्होंने अपने समय के रूढ़िवादी समाज और जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाई और सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी। आज भी, उनके आदर्श और विचार समाज सुधार के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

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